वादों के जाल बुने जा रहे हैं. इधर भी-उधर भी, भाजपा अभी ये बताने में मसरूफ है कि उसने पिछले चुनाव के कितने वादे पूरे कर दिए. कांग्रेस ये बताने के साथ कि वो अगर सत्ता में आई तो क्या-क्या कर देगी? ये भी बता रही है कि भाजपा ने क्या वादाफरामोशी की. कांग्रेस जनता से पूछ-पूछ कर अपना घोषणा पत्र तैयार करेगी. घोषणा पत्र विकल्प बनने की जुगत में लगे दल भी लेकर आ रहे हैं. दिलचस्प बात ये है कि राजनेताओं और राजनीतिक पार्टियों पर वादे भूल जाने का आरोप लगाने वाले लोग खुद चुनाव के वक्त इस बात को भूल जाते हैं कि राजनेताओं के वादे हैं वादों का क्या? ये सिलसिला तब से चल रहा है जब से चुनाव हो रहे हैं. वादों का ये तिलस्म कैसे चुनाव की एक जरूरी रवायत बन गया है और वोट जुगाड़ने में अभी भी इतना कारगर कैसे है? महासंग्राम में इस पर चर्चा देखिए...from Latest News राजस्थान News18 हिंदी https://ift.tt/2qpav3r

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